Monday, October 9, 2017

परिमेय संख्या

 परिमेय संख्या:- 
                       परिमेय संख्या दो पूर्ण संख्याओं का अनुपात होती है।
                                                    या
              जब एक पूर्ण संख्या में दूसरी पूर्ण संख्या से भाग देने पर प्राप्त लघुत्तम परिमेय संख्या कहलाती है।
गणितीय रूप में - वह संख्या जिसे p/q के रूप में व्यक्त कर सकें। जहांं p,q कोई दो पूर्ण संख्याऐं हैं। और q=0 नहीं है। परिमेय संख्या कहलाती है। उदाहरण :- 4, 2/7, 2.45, 0.69 इत्यादि ।

परिमेय संख्याओं के गुणधर्म :-(क) दो धनात्मक परिमेय संख्याओं का योग एक धनात्मक परिमेय संख्या होती है। 
उदाहरण :-( 1) 4/1+5/1=9
 (2) 0.25+0.47=0.72   (3) 2.10+1.45=3.55 (4) 2/7+3/7=5/7
इस प्रकार9, 0.72, 3.55, 5/7 एक धनात्मक परिमेय संख्या है।

(क) दो ऋणात्मक परिमेय संख्याओं का योग एक ऋणात्मक परिमेय संख्या होती है।

उदाहरण :- (1) -7 + -3= -10               (2) - 0.14 + - 0.82 = - 0.96
                (3) -3.4 + -1.5= - 4.9       (4) -2/7 + -1/7= -3/7                          (5) 2/-5 + 3/-5 = -5/5 = -1
इस प्रकार संख्या  -10, -0.96, -4.9, -3/7, -1 ‌‌‌‌‌‌ऋणात्मक परिमेय संख्याऐं हैं।
(ख) दो धनात्मक य‌ा ऋणात्मक परिमेय संख्याओं का गुणनफल एक धनात्मक परिमेय संख्या होती है।
उदाहरण :- (क) 4*5=20                          (ख) 1.5*1.4=2.10
                (ग) 0.41*0.14=0.0574         (घ) 2/3*1/4=2/12=1/6
                (च) -3*-4=-12                       (छ)-1.2*-1.3=1.56                        (ज)-0.14*-0.1=0.014           (झ)-2/5*-3/4=-9/20
(ग) धनात्मक और ऋणात्मक परिमेय संख्याओं का गुणनफल  सदैव एक ऋणात्मक परिमेय संख्या होती है।
 उदाहरण :-      (क)3*-4=-12                    (ख)0.7*-0.2=-0.14                            (ग) -1/7*2/3=-2/21 
(घ) किसी धनात्मक परिमेय संख्या का व्युत्क्रम धनात्मक होता है।



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